आग से जला मेडिकल स्टोर, बीमा क्लेम ठुकराने पर कंपनी को पड़ा महंगा—5.13 लाख भुगतान के निर्देश

भोपाल गाढ़े वक्त में बीमा दावे का भुगतान करने से मना करने की प्रवृत्ति पर उपभोक्ता आयोग ने तगड़ी चोट की है। भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने एक फैसले में उपभोक्ता को राहत देते हुए उसे पांच लाख 13 हजार रुपये का बीमा दावा भुगतान का आदेश दिया है। मेडिकल स्टोर में आग लगने से उपभोक्ता का सारा माल जल गया, बीमा कंपनी ने नुकसान की भरपाई से पल्ला झाड़ लिया था। ऋण और बीमा का विवरण गांधीनगर निवासी रमेश मेडिकल स्टोर के संचालक मंटू भारती ने अपनी दुकान के लिए बैंक से ऋण लिया था, जिसके तहत उन्होंने

Wrriten By :

Editor

Published On :

जनवरी 18, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

भोपाल
गाढ़े वक्त में बीमा दावे का भुगतान करने से मना करने की प्रवृत्ति पर उपभोक्ता आयोग ने तगड़ी चोट की है। भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने एक फैसले में उपभोक्ता को राहत देते हुए उसे पांच लाख 13 हजार रुपये का बीमा दावा भुगतान का आदेश दिया है। मेडिकल स्टोर में आग लगने से उपभोक्ता का सारा माल जल गया, बीमा कंपनी ने नुकसान की भरपाई से पल्ला झाड़ लिया था।

ऋण और बीमा का विवरण
गांधीनगर निवासी रमेश मेडिकल स्टोर के संचालक मंटू भारती ने अपनी दुकान के लिए बैंक से ऋण लिया था, जिसके तहत उन्होंने टाटा एआईजी से बीमा कराया था। वे नियमित रूप से ढाई हजार रुपये प्रीमियम का भुगतान कर रहे थे। दुकान का बीमा 21 मई 2022 से मई 2024 तक प्रभावी था।
 
अग्निकांड और नुकसान का आकलन
इसी बीमित अवधि के दौरान, 30 जून 2024 की रात करीब दो से तीन बजे के बीच दुकान में भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड में दवाइयां और अन्य सामग्री जलने से संचालक को लगभग 10 लाख रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। पीड़ित ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया। कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने मौके का मुआयना कर 5.05 लाख रुपये के नुकसान की पुष्टि की थी। इसके बावजूद, बीमा कंपनी ने दस्तावेजों में विसंगति का हवाला देते हुए क्लेम को पूरी तरह खारिज कर दिया।

उपभोक्ता आयोग का फैसला और सख्त टिप्पणी
न्याय की गुहार लेकर पीड़ित ने मार्च 2025 में उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। जिला आयोग के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल व सदस्य डा. प्रतिभा पांडेय की बेंच ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह गांधी नगर स्थित रमेश मेडिकल स्टोर के संचालक को क्षतिपूर्ति के रूप में 5.13 लाख रुपये का भुगतान करे।

आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि एक व्यवसायी का रोजगार छिन गया और कंपनी राहत देने के बजाय कागजी विसंगतियों का बहाना बनाती रही। उपभोक्ता मामले की अधिवक्ता मोना पालीवाल ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि जब सर्वेयर ने नुकसान का आकलन कर लिया था, तो कम से कम उतनी राशि का भुगतान तत्काल किया जाना चाहिए था। कागजी विसंगतियों के आधार पर किसी का हक नहीं मारा जा सकता।

Leave a Comment

2