महिलाओं और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए बड़ा कदम, NGO, महिला आयोग और Google आए एक मंच पर

महिलाओं और बच्चों की डिजिटल और साइबर सुरक्षा के लिए एनजीओ, महिला आयोग और गूगल एक मंच पर भोपाल  डिजिटल तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा आज देश के सामने सबसे बड़ी सामाजिक और तकनीकी चुनौतियों में शामिल हो गई है। इसी चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग, आहान फाउंडेशन और वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल के सहयोग से भोपाल में आयोजित विशेष एनजीओ मीट में डिजिटल सुरक्षा , साइबर अपराधों की रोकथाम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग पर व्यापक विमर्श

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Published On :

जुलाई 9, 2026

महिलाओं और बच्चों की डिजिटल और साइबर सुरक्षा के लिए एनजीओ, महिला आयोग और गूगल एक मंच पर

भोपाल 

डिजिटल तकनीक के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा आज देश के सामने सबसे बड़ी सामाजिक और तकनीकी चुनौतियों में शामिल हो गई है। इसी चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग, आहान फाउंडेशन और वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी गूगल के सहयोग से भोपाल में आयोजित विशेष एनजीओ मीट में डिजिटल सुरक्षा , साइबर अपराधों की रोकथाम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग पर व्यापक विमर्श हुआ।

मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग परिसर में आयोजित कार्यक्रम में आयोग की सदस्य श्रीमती साधना स्थापक ने कहा कि डिजिटल युग ने जितने अवसर उपलब्ध कराए हैं, उतनी ही नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा केवल कानून या तकनीक का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की बदलती प्रकृति को देखते हुए डिजिटल जागरूकता, समय पर शिकायत और सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार को जन-आंदोलन का स्वरूप देना होगा।उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों को डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग सिखाना समय की आवश्यकता है। परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, तकनीकी प्रशिक्षण संस्थानों और शासन के समन्वित प्रयासों से ही ऐसा डिजिटल वातावरण बनाया जा सकता है, जहां प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस करे।

कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर भी उपस्थित रहे। ‘रिस्पॉन्सिबल नेटिजन’ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित संवाद में महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने भाग लेकर जमीनी अनुभव साझा किए तथा डिजिटल सुरक्षा को लेकर सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम में गूगल की डायरेक्टर (सर्च एंड जेनरेटिव एआई ट्रस्ट एंड सेफ्टी) सुस्निग्धा भारद्वाज ने ‘चाइल्ड सेफ्टी एंड एआई’ विषय पर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास बच्चों और समाज के हितों को केंद्र में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन जोखिमों की पहचान और बच्चों के लिए जिम्मेदार डिजिटल वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं गूगल के ट्रस्ट एंड सेफ्टी विभाग के समीर ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं और सुरक्षा मानकों की जानकारी साझा की।

आहान फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुसोनाली पाटणकर ने डिजिटल सुरक्षा पर आयोजित विशेष सत्र में साइबर धोखाधड़ी, ऑनलाइन उत्पीड़न, फर्जी लिंक, डेटा सुरक्षा और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग से जुड़े व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्षरता आज केवल एक कौशल नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है।

कार्यक्रम के समापन पर सभी सहभागी स्वयंसेवी संस्थाओं ने महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित, समावेशी और विश्वासपूर्ण डिजिटल इकोसिस्टम के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि शासन, तकनीकी संस्थान, स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज के सामूहिक प्रयासों से ही साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है तथा डिजिटल भारत के सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है।