महिला स्वास्थ्य पर बड़ा कदम: स्कूलों में सैनेटरी पैड की व्यवस्था अनिवार्य

नई दिल्ली SC ने सैनिटरी पैड को लेकर बड़ा निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि सभी राज्यों के स्कूलों में छात्राओं के लिए सैनिटरी पैड जरुर होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत अब 'मासिक धर्म स्वच्छता' का अधिकार भी शामिल है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे 3 महीने के भीतर स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय और सैनिटरी पैड की उपलब्धता सुनिश्चित करें।  कोर्ट ने दी भावुक टिप्पणी सुनवाई के दौरान अदालत ने समाज और

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Published On :

जनवरी 30, 2026

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नई दिल्ली

SC ने सैनिटरी पैड को लेकर बड़ा निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि सभी राज्यों के स्कूलों में छात्राओं के लिए सैनिटरी पैड जरुर होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत अब 'मासिक धर्म स्वच्छता' का अधिकार भी शामिल है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे 3 महीने के भीतर स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय और सैनिटरी पैड की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

 कोर्ट ने दी भावुक टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने समाज और सिस्टम को आईना दिखाते हुए कहा कि यह आदेश उन लड़कियों के लिए है जो झिझक के कारण मदद नहीं मांग पातीं। कोर्ट ने कहा, "हम हर उस बच्ची को यह संदेश देना चाहते हैं जो शायद इसलिए स्कूल नहीं जा पाती क्योंकि उसके शरीर (मासिक धर्म) को बोझ समझा जाता है। इसमें उसकी कोई गलती नहीं है।" कोर्ट ने आगे कहा कि किसी भी समाज की प्रगति इस बात से मापी जाती है कि वह अपने सबसे कमजोर वर्ग की रक्षा कैसे करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए 3 बड़े निर्देश:

1.      अलग टॉयलेट: हर सरकारी और निजी स्कूल में छात्राओं के लिए अलग शौचालय और पानी की व्यवस्था अनिवार्य होगी। इसमें दिव्यांग छात्राओं की सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।

2.      फ्री सैनिटरी नैपकिन: स्कूलों को परिसर में ही बायो-डिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने होंगे। निजी स्कूलों को चेतावनी दी गई है कि नियमों का पालन न करने पर उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है।

3.      स्वच्छता केंद्र (MHM): स्कूलों में एक 'मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन केंद्र' बनाना होगा, जहाँ इमरजेंसी के लिए अतिरिक्त यूनिफॉर्म और जरूरी सामान मौजूद रहे।

यह फैसला जया ठाकुर और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से दायर याचिकाओं पर आया है, जिसमें स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की बढ़ती संख्या और गरिमा के उल्लंघन पर चिंता जताई गई थी।

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