रेड फ्लैग से बदले का ऐलान! मस्जिद पर झंडा फहराने का क्या है मतलब

नई दिल्ली ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देश में तनाव और गहरा गया है। उनकी मौत के तुरंत बाद क़ोम शहर की मशहूर जामकरान मस्जिद के गुंबद पर लाल रंग का 'इंतकाम का झंडा' फहराया गया। इसे बदले और न्याय के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह लाल झंडा समर्थकों के गुस्से और बदले की भावना को दर्शाता है। जामकरान मस्जिद ईरान में धार्मिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है, इसलिए वहां झंडा फहराना एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। बताया गया है कि खामेनेई

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Published On :

मार्च 1, 2026

नई दिल्ली

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देश में तनाव और गहरा गया है। उनकी मौत के तुरंत बाद क़ोम शहर की मशहूर जामकरान मस्जिद के गुंबद पर लाल रंग का 'इंतकाम का झंडा' फहराया गया। इसे बदले और न्याय के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह लाल झंडा समर्थकों के गुस्से और बदले की भावना को दर्शाता है। जामकरान मस्जिद ईरान में धार्मिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है, इसलिए वहां झंडा फहराना एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

बताया गया है कि खामेनेई की मौत शनिवार को तेहरान में हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में हुई। ईरानी सरकारी मीडिया ने रविवार को उनकी मौत की पुष्टि की, जिसके बाद ईरान समेत कई देशों में शोक और प्रदर्शन शुरू हो गए।

अमेरिका और इजरायल की प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बयान जारी कर कहा कि खामेनेई इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक थे। उन्होंने इसे ईरानी जनता के लिए बड़ा मौका बताया कि वे अपने देश को वापस ले सकते हैं।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ऐसे कई संकेत हैं कि यह तानाशाह अब जिंदा नहीं है। उन्होंने ईरान की जनता से अपील की कि वे एकजुट होकर मौजूदा शासन को खत्म करें और अपना भविष्य सुरक्षित करें।

इजरायली सेना (IDF) ने दावा किया कि खामेनेई इजरायल को खत्म करने की योजना के मुख्य योजनाकार थे। उनकी मौत की खबर आने के बाद तेहरान की सड़कों पर कुछ जगहों से खुशियों की आवाजें भी सुनी गईं, जबकि उनके निवास वाले इलाके के ऊपर काला धुआं देखा गया।

ईरान में आगे की व्यवस्था

खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने अस्थायी नेतृत्व की व्यवस्था की है। 66 वर्षीय धर्मगुरु अलीरेजा अराफी को तीन सदस्यीय अस्थायी नेतृत्व परिषद में शामिल किया गया है।

सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, अराफी को परिषद में धार्मिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। इस परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और मुख्य न्यायाधीश गुलामहुसैन मोहसिनी एजई भी शामिल हैं। यह परिषद तब तक देश का नेतृत्व संभालेगी जब तक एक्सपर्ट्स की असेंबली नए सर्वोच्च नेता का चयन नहीं कर लेती। सरकारी मीडिया ने इस नियुक्ति की पुष्टि की है।

 

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