UP में अनोखा मामला: जिंदा शख्स ने करवाई अपनी तेरहवीं, 1900 मेहमानों को बुलाकर सबको चौंकाया

उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से आई यह कहानी हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती है। अकेलेपन और भविष्य की चिंता ने 65 वर्षीय राकेश यादव को ऐसा फैसला लेने पर मजबूर किया, जिसकी पूरे इलाके में चर्चा है। राकेश यादव ने जीते-जी अपनी ही तेरहवीं कर डाली। उन्होंने करीब 1900 लोगों को इस अनोखे भोज में आमंत्रित किया, ताकि उनके मरने के बाद होने वाले सभी संस्कारों का “झंझट” पहले ही खत्म हो जाए। निमंत्रण पत्र भी उतना ही भावुक था निमंत्रण पत्र भी उतना ही भावुक था। उसमें मशहूर डायलॉग लिखा था,

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Published On :

मार्च 31, 2026

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से आई यह कहानी हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती है। अकेलेपन और भविष्य की चिंता ने 65 वर्षीय राकेश यादव को ऐसा फैसला लेने पर मजबूर किया, जिसकी पूरे इलाके में चर्चा है।

राकेश यादव ने जीते-जी अपनी ही तेरहवीं कर डाली। उन्होंने करीब 1900 लोगों को इस अनोखे भोज में आमंत्रित किया, ताकि उनके मरने के बाद होने वाले सभी संस्कारों का “झंझट” पहले ही खत्म हो जाए।
निमंत्रण पत्र भी उतना ही भावुक था

निमंत्रण पत्र भी उतना ही भावुक था। उसमें मशहूर डायलॉग लिखा था, 'मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था।' मानो यह लिखकर वो अपने जीवन की पीड़ा को बयान कर रहे हों।मुरादगंज चौकी क्षेत्र के लक्ष्मणपुर गांव में सोमवार दोपहर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

राकेश यादव तीन भाइयों में सबसे बड़े थे, लेकिन किसी ने शादी नहीं की। दो भाइयों की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। अब परिवार में सिर्फ उनकी एक विवाहित बहन ही बची हैं।

मेरी तेरहवीं कौन कराएगा, इस चिंता ने मजबूर किया

बुढ़ापे में सहारे की कमी और अपने अंतिम संस्कार को लेकर उठते सवालों ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। उनका कहना है, मेरे बाद मेरा अंतिम संस्कार कौन करेगा, मेरी तेरहवीं कौन कराएगा। इसी चिंता ने मुझे यह फैसला लेने पर मजबूर किया।

पैतृक घर भी एक रिश्तेदार को दान कर दिया

राकेश ने अपना पैतृक घर भी एक रिश्तेदार को दान कर दिया और अब वह एक साधारण मड़ैया में रह रहे हैं। उन्हें रिश्तेदारों पर भी भविष्य को लेकर भरोसा नहीं है। उन्होंने अपनी वृद्धावस्था पेंशन और वर्षों की मेहनत से बचाए पैसों से यह पूरा आयोजन कराया।

करीब 150 कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें बर्तन भेंट किए

भोज की शुरुआत कन्या पूजन से हुई, जिसमें करीब 150 कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें बर्तन भेंट किए गए। इसके बाद विशाल भंडारे में पूड़ी, सब्जी और बूंदी के लड्डू परोसे गए।

रिश्तेदारों का भी खास ख्याल रखा गया। करीब 100 महिला रिश्तेदारों को साड़ियां और 90 पुरुष रिश्तेदारों को बर्तन भेंट किए गए।

बहन भी पहुंचीं, जो पूरे दृश्य को देखकर भावुक हो उठीं

इस अनोखे आयोजन में उनकी बहन कालिंद्री भी पहुंचीं, जो पूरे दृश्य को देखकर भावुक हो उठीं। यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उस सच्चाई का आईना है जहां अकेलापन इंसान को जीते-जी अपने अंत की तैयारी करने पर मजबूर कर देता है।

 

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