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चुनावों से पहले शुरु हुआ बयानबाज़ी का खेला, किसकी होगी जीत और कौन रह जाएगा अकेला

चुनावों से पहले शुरु हुआ बयानबाज़ी का खेला, किसकी होगी जीत और कौन रह जाएगा अकेला

चुनावों के करीब आते ही बयानबाज़ी का भी खेल शुरु हो गया है। सत्ता हासिल करने के लिए पक्ष और विपक्ष दोनों ही पार्टियां एक-दूसरे पर हमला बोल रही है। इसी कड़ी में अलीगढ़ ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर भाजपा पर हमला बोलते हुए राजभर ने कृषि कानूनों की वापसी पर मोदी पर तंच कसते हुए कहा कि पीएम मोदी ने मौखिक रुप से बिल वापस लिया है लेकिन देश की जनताको अब मोदी सरकार पर बिल्कुल भरोसा नहीं रहा है तभी अन्नदातों को साफ तौर पर ये कहना पड़ा कि जब तक लोकसभा में बिल वापस नहीं होता उनका ये प्रदर्शन जारी रहेगा। आगे सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओमप्रकाश राजभर ने भारतीय जनता पार्टी पर बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, जातिगत जनसंख्यासहित कई मुद्दों पर जमकर हमला बोला है। 

शहीद किसानों को मुआवजा दे सरकार- राजभर 
लखीमपुर खीरी कांड पर भी सियासी रोटी सेकने का मौका ओपी राजभर ने नहीं छोड़ा जिस पर राजभर ने कहा कि गृह राज्य मंत्री के बेटे ने गाड़ी से किसानों को कुचल दिया था, लेकिन उसके बाद भी मोदी सरकार ने गृह राज्य मंत्री को ना तो हटाया और ना ही बर्खास्त किया गया।

किसान आंदोलन के दौरान 50,000 से ज्यादा किसानों पर मुकदमे दर्ज किए गए, तो वही तमाम पार्टियों के ऊपर भी प्रोटेस्ट मार्च के दौरान मुकदमे दर्ज किए गए। क्या ऐसे में मोदी किसानों के ऊपर और तमाम पार्टियों के ऊपर दर्ज किए गए मुकदमे वापस लेगी ऐसे कई सवालों पर ओमप्रकाश राजभर ने कटाक्ष करते हुए बीजेपी पर निशाना साधते हुए। 

भाजपा सरकार जुमला सरकार 
कानूनी घोषणा पत्र में गृह मंत्री अमित शाह ने जनता की वोट लेने के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए थे, जो जुमला साबित हो रहे है। तो वही कृषि कानून को जब तक लोकसभा में खत्म नहीं किया जा सकता तब तक मोदी की बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता 1931 के दौरान जातिगत जनगणना हुई थी। आगे राजभर ने कहा कि जब तक जातिगत जनगणना नहीं हो जाएगी।

तब तक ओमप्रकाश राजभर दूसरे विषय में कुछ नहीं कह सकता है, जबकि 90 साल हो चुके है जातिगत जनगणना को हुए। बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के संविधान में दिया गया था कि हर 10 साल के अंदर जातिवाद जनगणना की जाएगी जबकि देश में 90 साल तक कांग्रेस और भाजपा की सरकार ही लंबे समय तक राज किया है, लेकिन इन दोनों ही सरकारों के द्वारा जातिगत जनगणना पिछले 90 साल से नहीं कराई गई है। 


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