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गायत्री प्रजापति पर फैसला आज!

गायत्री प्रजापति पर फैसला आज!

सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ चल रहे गैंगरेप केस में सजा का फैसला आज हो जाएगा। सामूहिक दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट के तहत एमपी/ एमएलए कोर्ट आज उन्‍हें सजा सुनाएगी। 

बुधवार, 10 नवम्‍बर को कोर्ट ने प्रजापति और उनके दो साथियों को दोषी करार देते हुए सजा के लिए आज की तारीख मुकर्रर कर दी थी। कोर्ट ने जिन्हें दोषी करार दिया है, उनमें गायत्री प्रजापति के अलावा आशीष शुक्ला व अशोक तिवारी शामिल हैं। बरी होने वाले अभियुक्त रूपेश्वर उर्फ रूपेश, चंद्रपाल, विकास वर्मा अमरेंद्र सिंह पिंटू हैं। 

भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के अनुसार सामूहिक दुराचार में अधिकतम 20 वर्ष एवं पाक्सो एक्ट के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर 'उम्र कैद' तक की सजा का प्रावधान है। बता दें, इस मामले में अदालत ने गायत्री प्रजापति,अशोक तिवारी एवं आशीष कुमार शुक्ला को महिला से सामूहिक दुष्कर्म करने के अलावा नाबालिग बेटी से दुराचार करने के प्रयास का दोषी पाया था।

जानिए क्या था पूरा मामला?
दरअसल, 18 फरवरी, 2017 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गायत्री प्रसाद प्रजापति और अन्य छह अभियुक्तों के खिलाफ गैंगरेप, जानमाल की धमकी और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पीड़िता की याचिका पर दिया था। पीड़िता ने गायत्री प्रजापति और उनके साथियों पर गैंगेरप का आरोप लगाते हुए, अपनी नाबालिग बेटी के साथ भी जबरन शारीरिक संबध बनाने का आरोप लगाया था।

गायत्री प्रजापति समेत तीनों अभियुक्तों को अधिकतम 'आजीवन कारावास' की सजा या 'मृत्युदंड' भी हो सकता है। IPC की धारा 376-डी के तहत अधिकतम सजा के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान है।

पूरा मामला शुरू हुआ जब 2013 में पीड़िता चित्रकूट के राम घाट पर गंगा आरती के एक कार्यक्रम में मौजूदा कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति से मिली। उसके बाद वर्ष 2014 में पहली बार गायत्री ने उसके साथ रेप किया, फिर साल 2016 तक वह लगातार पीड़िता का अन्य लोगों के साथ मिलकर शारीरिक शोषण करते रहे।

दुराचार के तीन साल बाद यानी कि, 17 अक्टूबर 2016 को पहली बार पीड़िता ने यूपी के डीजीपी को इस मामले की शिकायत दी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसके बाद 16 फरवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस और सरकार को पीड़िता की एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।

18 जुलाई 2017 को यूपी पुलिस ने गायत्री प्रसाद प्रजापति, विकास वर्मा, आशीष शुक्ला और अशोक तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया। बाद में अमरेन्द्र सिंह उर्फ पिंटू, चंद्रपाल और रूपेश्वर उर्फ रूपेश के नाम भी जोड़े गए। 2 नवंबर 2021 को सभी आरोपियों के बयान दर्ज किए गए। 8 नवंबर 2021 को कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी कर ली।10 नवंबर 2021 को पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति, अशोक तिवारी एवं आशीष कुमार को दोषी करार दिया। वहीं अमरेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह, विकास वर्मा चंद्रपाल और रुपेशवर उर्फ रूपेश को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।

और आज 12 नवंबर को कोर्ट गायत्री की सजा पर फैसला सुनाएगी।

 


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