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आखिर मिल ही गया इंसाफ

आखिर मिल ही गया इंसाफ

कानून के घर देर है, लेकिन अंधेर नहीं ये कहावत इस मामले में बिल्कुल सटीक बैठती है। जहां 19 साल पहले हुई सामूहिक हत्याकांड की सज़ा आखिरकार दो आरोपियों को मिल ही गई पूरा मामला शाहजहांपुर से सामने आया है। जहां तीन बच्चों की सामूहिक हत्या के मामले में कोर्ट ने दो लोगों को फांसी की सज़ा सुनाई है।

2002 में हुई तीन बच्चियों की हत्या के मामले में विवेचना अधिकारी ने एक पिता को अपनी ही बच्चियों के हत्याकांड में एक पिता को झूठा जेल भेजने का दोषी पाया है जिसके बाद अब पिता ने विवेचना अधिकारी के लिए भी फांसी की मांग की है जबकि कोर्ट ने विवेचना अधिकारी के खिलाफ NBW वारंट जारी किया है। 

क्या था पूरा मामला?
दरअसल पूरा मामला निगोही थाना के जेवा मकरंदपुर का है जहां रहने वाले अवधेश कुमार की तीन बेटियां थीं। 15 अक्टूबर 2002 की रात तीनों बच्चियां घर पर सो रही थी तभी गांव के ही तीन युवकों ने घर में घुसकर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर बच्चियों की हत्या कर दी थी। जांच के दौरान पता चला कि तीनों आरोपी पुरानी रंजिश के चलते अवधेश को मारने के लिए आए थे। वहीं, इस घटना के बाद मामले की जांच कर रहे विवेचना अधिकारी होशियार सिंह ने आरोपियों के साथ मिलकर अवधेश को ही बच्चों की हत्या के आरोप में झूठा केस बनाकर जेल भेज दिया था। 

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दो महीने पिता को बनाया आरोपी 
मृतक बच्चियों का पिता करीब 2 महीने जेल में रहा जिसके बाद असली हत्यारों के नाम सामने आए। 19 साल चले कोर्ट में ट्रायल के बाद आखिरकार कोर्ट ने नरेश और राजेंद्र को फांसी की सजा सुनाई जबकि तीसरे आरोपी की मौत हो चुकी है। इसके अलावा कोर्ट ने जांच अधिकारी होशियार सिंह को पिता को फर्जी जेल भेजने के आरोप में दोषी पाया है। कोर्ट ने विवेचना अधिकारी होशियार सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।

बच्चों के पिता ने कोर्ट पर भरोसा जताया है। पिता का कहना है कि कोर्ट के कारण ही उन्हें न्याय मिल पाया पिता का यह भी कहना है कि उसे 2 महीने अपनी बेटियों के हत्या के झूठे आरोप में जेल भेजने वाले विवेचना अधिकारी को भी फांसी की सजा होनी चाहिए, तभी उसको सुकून मिलेगा |

 


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