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जनता पर मुसीबत बनकर गिरी नोटबंदी, नोटबंदी के पांच साल पूरे

जनता पर मुसीबत बनकर गिरी नोटबंदी, नोटबंदी के पांच साल पूरे

जनता की मुसीबत शायद कभी ना खत्म हो, आए दिन कोई ना कोई परेशानियां जनता के सामने आते रहती है। कोरोना काल से पहले जनता पर आज से पांच साल पहले नोटबंदी का गाज जनता पर गिरी थी, वहीं अब दो साल से कोरोना की गाज जनता पर गिरी हुई है। 

आज से ठीक पांच साल पहले यानी की आठ नवंबर 2016 को मोदी सरकार की तरफ से काले धन पर प्रहार करने के लिए नोटबंदी का फैसला किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने 8 नवंबर 2016 की आधी रात को पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों को बंद करने का ऐलान किया था। इस फैसले का मुख्य मकसद देश में डिजिटल उद्देश्य को बढ़ाने के साथ ही काले धन पर रोक लगानी थी। बता दें की इसके बाद से ही पूरे देश में आधी रात से 500 और 1000 के नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे। 

अब 500 और 1000 की जगह नए तरह का 500 और 2000 का नोट चलन में है, वहीं इसको लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने नोटबंदी के पांच साल पूरे होने के मौके पर सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा नोटबंदी के पांच साल पूरे होने पर कांग्रेस ने इसकी सफलता पर सवाल खड़े किए हैं और सवाल किया कि अगर यह कदम सफल था तो फिर भ्रष्टाचार खत्म क्यों नहीं हुआ और आतंकवाद पर चोट क्यों नहीं हुई ? 

प्रियंका ने नोटबंदी को डिजास्टर बताया है उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘अगर नोटबंदी सफल थी तो भ्रष्टाचार खत्म क्यों नहीं हुआ ? कालाधन वापस क्यों नहीं आया ? अर्थव्यवस्था कैशलेस क्यों नहीं हुई ? आतंकवाद पर चोट क्यों नहीं हुई ? महंगाई पर अंकुश क्यों नहीं लगा ?’’ 

वहीं नोटबंदी होने के बाद पूरे देश में अफरातफरी का माहौल रहा और बैंकों के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं। बाद में 500 रुपये और 2000 रुपये के नये नोट जारी किए गए। इससे काफी लोगों को और आम जनता को तो खास तौर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 


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