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21वीं सदी में देश बेहाल

21वीं सदी में देश बेहाल

योगी सरकार भले ही विकास और जनता के लिए तरह-तरह के अभियान चलाकर, करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। लेकिन आज भी कई ऐसे परिवार हैं, जिनके दरवाजे तक सरकार की मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाती हैं। उनकी परेशानियां अधिकारी और कर्मचारी अपने दफ्तरों में ही ताला लगाकर लॉक कर देते हैं। जिस कारण उन्हें सरकार की सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। और वो दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर थक जाते हैं। 

दरअसल ये मामला शाहजहांपुर के कलान तहसील के गांव खजुरी के मजरा गढ़ी का है। जहां एक ऐसा परिवार है, जो अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। देश को आजाद हुए लगभग 75 साल हो गए। कई प्रधानों के पास जिम्मेदारी आकर चली गई। लेकिन इस घर पर अभी तक शौचालय और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंची। गढ़ी गांव के निवासी कल्लू ने बताया कि गरीबी हालत में वो अपना गुजारा कर रहे हैं। उनकी 4 लड़कियां और दो लड़के  है। 

जिसमें दो लड़कियों की शादी कर दी है। लेकिन अभी दो कुंवारी हैं। और एक लड़के की मौत हो चुकी है। जबकि 8 वर्षीय मासूम लड़का है। जो लगभग 2 सालों से बीमार है। उसके इलाज के लिए पैसे भी इकट्ठे नहीं हो पा रहे है। गरीब परिवार को आस है कि। कोई ऐसा नेता या समाजसेवी सहारा बन जाए। जिससे घर के खाने का बंदोबस्त हो जाए और दो वक्त की रोटी सही से खा सके परिवार। 

पीड़ित परिवार का कहना है कि अभी तक किसी भी समाजसेवी या नेता ने हमारी मदद नहीं की। जबकि नेता लोग वोट तो मांगने आए। लेकिन दरवाजे पर दोबारा झांकने तक नहीं आए। जिससे सरकार की योजनाओं का लाभ हमको भी मिल जाएं। ये हमारी देश की 21वीं सदी है। जहां आज भी गरीबी और भुखमरी से हमारी जनता जूझ रही है। 


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