
Supreme Court on Firecrackers: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है, बल्कि इस विषय पर एक संतुलित आदेश पारित करना चाहता है। अदालत का मानना है कि त्योहारों के अवसर पर लोगों के उत्साह और खुशियों को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने सुझाव दिया कि पटाखों के कम इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विराट कोहली जैसी लोकप्रिय हस्तियों की मदद ली जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आज की नई पीढ़ी पटाखों के इस्तेमाल को लेकर पहले से ही काफी जागरूक है। हालांकि, प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए उच्च स्तर पर ठोस और स्थायी नीतियां बनाकर काम करने की जरूरत है।
आदेशों का पालन कम, उल्लंघन ज्यादा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हर साल पटाखों पर आदेश जारी करने की प्रक्रिया पर अपनी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि हर साल इस मुद्दे पर निर्देश देना अब लगभग एक अकादमिक अभ्यास बनकर रह गया है। कोर्ट ने कड़वी सच्चाई को स्वीकारते हुए माना कि उसके आदेशों का जमीनी स्तर पर पालन कम और उल्लंघन ज्यादा होता है।
अदालत का कहना है कि केवल बैन (प्रतिबंध) लगा देने से समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है। ऐसे में केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय उन लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए जो तय नियमों और सीमाओं के परे जाकर अवैध रूप से पटाखों की बिक्री कर रहे हैं।
अमाइक्स क्यूरी की चेतावनी: ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त नहीं

अदालत की सहायता के लिए नियुक्त अमाइक्स क्यूरी ने पटाखों से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पटाखों के जलने से अत्यधिक मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5) उत्पन्न होता है। ये सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों और रक्तप्रवाह तक पहुंच जाते हैं, जिससे शरीर के अन्य अंग प्रभावित होते हैं और इंसानों में गंभीर बीमारियां पनपने का खतरा बढ़ जाता है।

अमाइक्स क्यूरी ने यह भी स्पष्ट किया कि तथाकथित ‘ग्रीन पटाखे’ भी पूरी तरह से पॉल्यूशन-फ्री नहीं होते। यद्यपि ये सामान्य पटाखों की तुलना में थोड़ा कम उत्सर्जन करते हैं, लेकिन हवा की गुणवत्ता (Air Quality) पर इनका भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
प्रदूषण नियंत्रण पर दिल्ली सरकार का पक्ष

दूसरी ओर, दिल्ली सरकार ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को आश्वस्त किया कि वह वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। राज्य सरकार ने बताया कि प्रदूषण को कम करने के लिए जल्द ही कई कड़े कदम उठाए जाएंगे। इसके तहत: दिल्ली में बाहर से आने वाले गैर-BS6 वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाना। ट्रैफिक और वाहनों के दबाव को कम करने के लिए सरकारी दफ्तरों के समय (Timings) में बदलाव करना। हवा में जमी धूल और स्मॉग को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर स्मॉग गन्स का उपयोग करना।
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि प्रदूषण नियंत्रण और जन-भावनाओं के बीच संतुलन बनाना समय की मांग है, जिसमें कड़ी कानूनी कार्रवाई और जन-जागरूकता दोनों का अहम योगदान रहेगा।











