बागपत की बड़ौत सीट पर सियासी हलचल, जानें जातीय समीकरण और चुनावी इतिहास

बड़ौत में कांटे का मुकाबला: 2022 के चुनाव में बीजेपी के केपी मलिक ने आरएलडी के जयवीर को महज 315 वोटों से हराया था। ऐसे में 2027 का चुनाव भी दिलचस्प हो सकता है

बीजेपी के सामने सीट बचाने की चुनौती: केपी मलिक की दावेदारी, विकास कार्य और क्षेत्र में उनकी सक्रियता आगामी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकती है

आरएलडी की रणनीति पर नजर: 2022 में बेहद कम अंतर से हारने वाली आरएलडी के लिए बड़ौत महत्वपूर्ण सीट है। हालांकि, 2027 में सीट बंटवारे पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है

सपा की वापसी की कोशिश: समाजवादी पार्टी बेरोजगारी, महंगाई, किसान समस्याओं और स्थानीय मुद्दों के सहारे अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिश कर सकती है

जाट और किसान राजनीति का प्रभाव: बड़ौत में जाट मतदाताओं, किसान संगठनों और चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत का चुनावी समीकरणों में महत्व रह सकता है

गन्ना भुगतान बनेगा बड़ा मुद्दा: किसानों के लिए गन्ने का समय पर भुगतान, खेती की बढ़ती लागत और आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा अहम सवाल हो सकते हैं

स्थानीय समस्याएं भी अहम: रोजगार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, यातायात और जलभराव जैसे मुद्दे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं

2027 में किसकी बनेगी बढ़त? बीजेपी, आरएलडी, सपा और बसपा की रणनीति, गठबंधन और उम्मीदवारों का चयन चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल किसी भी दल ने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है