साल 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है, जिससे सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
पूर्वांचल की हॉट सीटों में शुमार मऊ सदर विधानसभा सीट पर इस बार भी चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा होने के आसार हैं।
मऊ सदर सीट पर लंबे समय तक मुख्तार अंसारी परिवार का दबदबा रहा है। 1996 से 2017 तक मुख्तार अंसारी लगातार छह बार यहां से विजयी रहे।
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा-सुभासपा गठबंधन के टिकट पर लड़े अब्बास अंसारी ने शानदार जीत दर्ज कर अपनी सियासी पकड़ साबित की थी।
2022 में दूसरे स्थान पर रही भाजपा के सामने इस बार अपने वोटों को एकजुट करने और आधार का दायरा बढ़ाने की बड़ी चुनौती होगी।
इस सीट के चुनावी समीकरण में मुस्लिम, राजभर, यादव और दलित मतदाताओं की संख्या और उनका रुझान हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
राजनीतिक समीकरणों के अलावा मऊ का प्रसिद्ध पावरलूम और बुनकरी उद्योग, बिजली की दरें, बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दे भी चुनावों में छाए रहेंगे।
बहुजन समाज पार्टी भी अपने पारंपरिक वोट बैंक को साधते हुए मऊ सदर में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए जोर लगा रही है।
2027 के चुनाव में कौन-सा दल किस गठबंधन के तहत किसे मैदान में उतारता है, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा क्योंकि इसी पर अंतिम जीत का गणित टिका है।