उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है, जहाँ मुकाबला बीजेपी के 'जीरो टॉलरेंस' और सपा के 'PDA' फॉर्मूले के बीच माना जा रहा है
दिल्ली से सटी पश्चिमी यूपी की यह वीआईपी शहरी सीट राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण और बीजेपी का मजबूत किला मानी जाती है
इस हाई-प्रोफाइल अर्बन क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर अब लगभग 4.76 लाख से 4.80 लाख के पार पहुँच चुकी है
गाजियाबाद सदर सीट पारंपरिक रूप से ब्राह्मण, वैश्य और पंजाबी बहुल है, जो बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है
2017 और 2022 में अतुल गर्ग ने भारी अंतर से जीत दर्ज की, जबकि 2024 उपचुनाव में बीजेपी के संजीव शर्मा ने करीब 69,351 वोटों से जीत हासिल की
जीटी रोड, पुराना बस अड्डा और मुख्य बाजारों में भीषण जाम व पार्किंग की कमी स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता है
मानसून में निचले इलाकों में जलभराव, सीवर ओवरफ्लो और नलों में गंदे पानी की सप्लाई से जनता परेशान है
AQI का खतरनाक स्तर और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की ढुलमुल व्यवस्था शहर के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है
2027 में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता 'ब्रांड योगी' के विकास मॉडल पर भरोसा जताती है या स्थानीय बुनियादी मुद्दों पर मतदान करती है