Stock Market Crash : 8 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने बाजार का मूड बिगाड़ दिया। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक की सख्त मौद्रिक नीति ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। नतीजा यह रहा कि सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा टूट गया और निफ्टी भी तेज गिरावट के साथ बंद हुआ।
सेंसेक्स 1,045 अंक गिरकर 71,593 पर बंद
कारोबार खत्म होने पर बीएसई सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ। यह फरवरी 2024 के बाद इसका सबसे निचला बंद स्तर रहा। वहीं एनएसई निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत टूटकर 22,231.80 पर पहुंच गया। निफ्टी का यह स्तर करीब 18 महीने का निचला स्तर बताया गया है।

निवेशकों की संपत्ति में करीब 10 लाख करोड़ की कमी
बाजार में चौतरफा गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार गुरुवार की बिकवाली के दौरान बाजार पूंजीकरण में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। यानी एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की कुल संपत्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई। व्यापक बाजार में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
गिरावट केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेज कमजोरी देखने को मिली। प्रमुख सेक्टरों में भी व्यापक बिकवाली रही। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में से लगभग सभी गिरावट के साथ बंद हुए। इससे बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति का पता चला।
रियल्टी, मेटल और एनर्जी शेयरों पर ज्यादा दबाव
ऊंची ब्याज दर और महंगे कच्चे तेल की वजह से संवेदनशील सेक्टरों में ज्यादा दबाव दिखाई दिया। रियल्टी, मेटल, ऑयल एंड गैस समेत कई क्षेत्रों के शेयरों में तेज गिरावट आई। पूंजी की लागत बढ़ने की आशंका और कच्चे माल की महंगाई ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।
आईटी सेक्टर ने दिखाई कुछ मजबूती
बाजार की व्यापक गिरावट के बीच आईटी इंडेक्स अपेक्षाकृत मजबूत रहा। शुरुआती कारोबार में आईटी इंडेक्स करीब 1.8 प्रतिशत तक चढ़ा था और टीसीएस के शेयरों में भी तेजी देखी गई। सितंबर तिमाही के नतीजों का सीजन शुरू होने के कारण आईटी कंपनियों पर निवेशकों की नजर बनी हुई थी।

अडानी एंटरप्राइजेज में करीब 5.4 प्रतिशत गिरावट
निफ्टी के प्रमुख शेयरों में अडानी एंटरप्राइजेज करीब 5.4 प्रतिशत गिरकर सबसे ज्यादा दबाव वाले शेयरों में रहा। जेएसडब्ल्यू स्टील और आईटीसी में भी चार प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की गई। दूसरी तरफ इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एक्सिस बैंक जैसे कुछ शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।
RBI की रेपो रेट बढ़ोतरी बनी बड़ी वजह
बाजार में बिकवाली के पीछे घरेलू स्तर पर RBI का ताजा फैसला भी अहम रहा। रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। साथ ही मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया गया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली रेपो रेट बढ़ोतरी थी।मध्य पूर्व से जुड़ी आपूर्ति चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहा। रिपोर्टों के मुताबिक कीमत करीब 102 से 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंची। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल आयात बिल, महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ा सकता है।
FII की भारी बिकवाली से दबाव बढ़ा
विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की गिरावट को बढ़ाया। 8 अक्टूबर को FII ने करीब 6,121.40 करोड़ रुपये की भारतीय इक्विटी बेची। इसके साथ वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी और कमजोर रुपये ने भी विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयरों का आकर्षण प्रभावित किया।अब निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक RBI के सख्त रुख और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
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