भाद्रपद माह का आखिरी प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे 'गुरु प्रदोष' या 'बृहस्पति प्रदोष' कहा जाएगा
पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 23 सितंबर 2026 की रात 10:50 बजे से शुरू होकर 24 सितंबर की रात 11:18 बजे तक रहेगी
उदया तिथि की मान्यता के आधार पर गुरु प्रदोष का व्रत 23 की जगह 24 सितंबर (गुरुवार) को ही रखा जाएगा
विशेष आराधना के लिए 24 सितंबर को शाम 6:33 बजे से रात 8:56 बजे तक शुभ 'प्रदोष काल' रहेगा
24 सितंबर को सुबह 4:52 बजे से 5:40 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा, जो स्नान और ध्यान के लिए उत्तम समय है
इस दिन दोपहर 12:06 बजे से 12:55 बजे तक अभिजित मुहूर्त रहेगा। इस दौरान अन्य धार्मिक कार्य और दान-पुण्य किए जा सकते हैं
गुरु प्रदोष का व्रत ज्ञान, उच्च शिक्षा, धन-संपत्ति और घर में सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है
इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान भोलेनाथ के साथ-साथ देवगुरु बृहस्पति का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है
गुरु प्रदोष के दिन सुबह 10:35 बजे से 'रवि योग' लग रहा है, जो अगले दिन सुबह 6:11 बजे तक प्रभावी रहेगा
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