मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय राधा की बहादुरी, समय रहते लोगों को किया सतर्क

मुजफ्फरपुर. प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक हादसे के बीच मुशहरी प्रखंड के छपरा मेघ गांव की रहने वाली 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला राधा देवी की जांबाजी और सूझबूझ की कहानी हर किसी की जुबान पर है। बीपी और सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था। गुरुवार की सुबह जब वह जागी हुई थीं, तभी अचानक आईसीयू में शॉर्ट सर्किट से गाढ़ा धुआं फैलने लगा। ऐसे खौफनाक मंजर में जहां अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते हैं, वहां 95 साल की इस बहादुर दादी ने अद्भुत हिम्मत दिखाई। उन्होंने बिना डरे तुरंत अपने

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Published On :

जून 4, 2026

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मुजफ्फरपुर.

प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक हादसे के बीच मुशहरी प्रखंड के छपरा मेघ गांव की रहने वाली 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला राधा देवी की जांबाजी और सूझबूझ की कहानी हर किसी की जुबान पर है। बीपी और सांस लेने में तकलीफ के बाद उन्हें अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था। गुरुवार की सुबह जब वह जागी हुई थीं, तभी अचानक आईसीयू में शॉर्ट सर्किट से गाढ़ा धुआं फैलने लगा।

ऐसे खौफनाक मंजर में जहां अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते हैं, वहां 95 साल की इस बहादुर दादी ने अद्भुत हिम्मत दिखाई। उन्होंने बिना डरे तुरंत अपने मुंह से ऑक्सीजन मास्क हटाया, हाथ में लगी सलाइन (ग्लूकोज) की सुई खुद ही खींचकर निकाल दी और स्ट्रेचर से उठकर बाहर की तरफ भाग पड़ीं।

ऑन ड्यूटी नर्स को दी घटना की जानकारी
चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद राधा देवी गिरते-पड़ते आईसीयू से बाहर निकलीं और वहां ड्यूटी पर मौजूद नर्स (मैडम) को अंदर आग लगने की सूचना दी। राधा देवी की इसी चेतावनी के बाद अस्पताल प्रशासन तुरंत हरकत में आया, आनन-फानन में अन्य मरीजों को बाहर निकाला गया और फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। अगर दादी ने सही समय पर हिम्मत दिखाकर स्टाफ को न जगाया होता, तो हादसा और भी भयावह हो सकता था।

बाहर निकलली और मैडम के बतइली
"आग लगते ही पूरा अंधेरा हो गइलई। आग कइसे लगलई इ हम कईसे बताऊं? धुआं फैलते हम बाहर निकलली और मैडम के बतइली, तब मैडम अंदर जाकर देखलई।"

3 घंटे तक मां को ढूंढता रहा बेटा
घटना के बाद अस्पताल में मची भगदड़ के बीच राधा देवी खुद को बचाते हुए अस्पताल के ही एक दूसरे सुरक्षित कमरे में जाकर बैठ गईं। इधर, बाहर मौजूद उनका बेटा और परिजन इस आशंका से बुरी तरह रोते-बिलखते रहे कि कहीं मां आग की चपेट में न आ गई हों। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और खोजबीन के बाद जब परिजनों ने राधा देवी को सुरक्षित बैठे देखा, तब जाकर उनकी जान में जान आई। इसके बाद स्वजन उन्हें सुरक्षित घर ले गए।

भीषण आग के बाद मची चीख-पुकार
यह पूरी घटना शहर के ब्रह्मपुर स्थित नामी-गिरामी प्रसाद हॉस्पिटल की है, जहां गुरुवार की सुबह करीब साढ़े तीन बजे अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को शहर के अन्य विभिन्न अस्पतालों में शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस लगातार सड़कों पर दौड़ती रहीं।

हादसे में अब तक 5 मरीजों की मौत
इस भीषण अग्निकांड में दम घुटने और झुलसने के कारण अब तक कुल 5 मरीजों की मौत हो चुकी है। पहले चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, लेकिन बाद में गंभीर रूप से झुलसी महिला मरीज चंचला देवी को आसव (ASAV) अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

हादसे में जान गंवाने वाले सभी 5 मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है:
1. मृतका चंचला देवी: हादसे के बाद बेहद गंभीर हालत में इन्हें शहर के आसव (ASAV) अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था, जहां इन्होंने अंतिम सांस ली।
2. मृतक उदय कुमार (विशंभरपुर, शिवहर): पेशे से एलआईसी (LIC) एजेंट उदय कुमार की हाल ही में ब्रेन सर्जरी हुई थी। शोर सुनकर जब ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद उनका परिवार ऊपर भागा, तब तक वे दम तोड़ चुके थे।
3. मृतका गीता देवी (दिस्तौलिया, कथैया): शुगर, बीपी और डायलिसिस की मरीज गीता देवी 1 जून को ही अस्पताल में भर्ती हुई थीं।
4. मृतक शशांक (रतनपुरा, औराई): संजय चौधरी के पुत्र शशांक भी आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे, लेकिन आग की भेंट चढ़ गए।
5. मृतक कृष्णनंदन सिंह (78 वर्ष, गोरिगमा डीह, मीनापुर): फेफड़े में पानी की शिकायत के बाद 22 मई से डॉ. संजीव की यूनिट में इलाजरत थे।

4-4 लाख मुआवजे का ऐलान
हादसे की भयावहता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) सुब्रत कुमार सेन और पुलिस अधीक्षक (SP) समेत तमाम आला अधिकारी, सभी डीएसपी और फायर ऑफिसर दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत कार्य की निगरानी की। अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। डीएम सुब्रत कुमार सेन ने सभी 5 मृतकों के आश्रितों को सरकारी नियम के तहत 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि देने की घोषणा की है। साथ ही, अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किए गए सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर कराने और अस्पताल की बिजली वायरिंग व फायर सेफ्टी मानकों की जांच के कड़े निर्देश दिए हैं। बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता विजय कुमार भी टीम के साथ लोड और वायरिंग का जायजा लेने पहुंचे हैं।

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