राजस्थान की 6838 खदानें अरावली को कर रहीं खोखला, 10 साल में औषधीय पौधों पर संकट

अजमेर अरावली पर्वतमाला पर औषधीय महत्व के पौधे घट रहे हैं। पौधे कम होने से इसका तापमान बढ़ रहा है। राज्य की 6838 खदानें इसको लगातार खोखला करने में जुटी है। परिणाम स्वरूप पिछले 10 साल में करीब 1 हजार से ज्यादा औषधीय पौधे रेड जोन में पहुंच गए हैं। अजमेर जिले में खरेखड़ी, हाथीखेड़ा, अजयसर, बोराज, किशनगढ़, पुष्कर, श्रीनगर, सावर क्षेत्र में खनन जारी है। राज्य में उदयपुर, राजसमंद, सिरोही, जयपुर, अलवर, सीकर, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर और अन्य जिलों में भी खनन हो रहा है। सेन्ट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) की 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार 1967-68 के बाद राज्य में

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Published On :

नवम्बर 2, 2026

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अजमेर
अरावली पर्वतमाला पर औषधीय महत्व के पौधे घट रहे हैं। पौधे कम होने से इसका तापमान बढ़ रहा है। राज्य की 6838 खदानें इसको लगातार खोखला करने में जुटी है। परिणाम स्वरूप पिछले 10 साल में करीब 1 हजार से ज्यादा औषधीय पौधे रेड जोन में पहुंच गए हैं। अजमेर जिले में खरेखड़ी, हाथीखेड़ा, अजयसर, बोराज, किशनगढ़, पुष्कर, श्रीनगर, सावर क्षेत्र में खनन जारी है। राज्य में उदयपुर, राजसमंद, सिरोही, जयपुर, अलवर, सीकर, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर और अन्य जिलों में भी खनन हो रहा है। सेन्ट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) की 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार 1967-68 के बाद राज्य में अरावली का 35 प्रतिशत हिस्सा समाप्त हो गया है।

तेजी से बढ़ रहा तापमान
80 के दशक तक अरावली का तापमान गर्मी 18 से 20 डिग्री सेल्सियस और सर्दी में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक रहता था। अब अजमेर सहित जयपुर, सिरोही, राजसमंद, अलवर और अन्य जिलों में इसका सामान्य तापमान 32 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है।

यह पौधे हैं रेड लिस्ट में शामिल
    गूगल : कोलेस्ट्रॉल, गठिया और वजन नियंत्रण
    सफेद मूसली: रोग प्रतिरोधक क्षमता
    सफेद चंदन: त्वचा रोग और शीतलता
    रोहन: बुखार और पेट दर्द में
    अश्वगंधा: तनाव दूर करने के लिए
    अंजन/धोकड़ा : गैस्ट्रिक विकारों के लिए
    पाषाणभेद: किडनी और मूत्राशय की पथरी
    जख्म-ए-हयात: चोटों के उपचार के लिए
    अर्जुन : हृदय रोग में लाभदायदक
    बहेड़ा : त्रिफला का एक घटक
    हरड़: पाचन तंत्र में उपयोग
    गूलर : नकसीर-बवासीर रोग
    करंज : दाद, खाज, खुजली, सोरायसिस

एक्सपर्ट व्यू
अरावली दुनिया में जैव विविधता की सबसे बड़ी संरक्षक है। अवैध खनन और वन क्षेत्र में अतिक्रमण से जैव विविधता को नुकसान हो रहा है।
पहाड़ी क्षेत्र में विलायती बबूल का फैलाव घातक साबित हो रहा। अरावली के 1 हजार औषधीय पौधे रेड जोन में हैं। यह पर्यावरण के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
– प्रो. मनोज यादव, बॉटनी विभाग एसपीसी-जीसीए

विलुप्ति के कगार पर
    सालम मिश्री: कमजोरी दूर करने वाली टॉनिक
    गोखरु : मूत्र विकार और किडनी
    बीजासाल, गलगल, बिस्तेंदु, मिश्वाक

अत्यधिक संकटग्रस्त
सलई, कुल्लू कुमच, गुग्गल, बरना, दूधी, खिरनी काला, इंद्र जौ, जंगल जलेबी, हरड़, पुनर्नवा, पाठा, और वज्रदंती

अरावली में औषधीय पौधों के प्रमुख क्षेत्र
    अजमेर के तारागढ़, पुष्कर-नाग पहाड़
    कुंभलगढ़ और जरगा पहाड़ियां
    सिरोही, माउंट आबू और भाखर क्षेत्र
    उदयपुर और राजसमन्द

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