4 साल की मासूम की सर्पदंश से मौत, स्वजन का आरोप- वेंटिलेटर के लिए मांगे पैसे

ग्वालियर सांप के काटने के बाद जिंदगी और मौत से जूझ रही चार वर्षीय कासवी की जया आरोग्य अस्पताल के कमलाराजा अस्पताल में मौत हो गई। बच्ची को गंभीर हालत में बाल रोग विभाग के पीआईसीयू में भर्ती कराया गया था। मासूम की मौत के बाद स्वजन ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपचार को लेकर हंगामा किया। स्वजन का आरोप है कि बच्ची को समय पर वेंटीलेटर नहीं मिल सका और वेंटीलेटर लगाने के नाम पर पांच हजार रुपये की मांग की गई। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बच्ची की हालत अस्पताल

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Published On :

सितम्बर 7, 2026

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ग्वालियर

सांप के काटने के बाद जिंदगी और मौत से जूझ रही चार वर्षीय कासवी की जया आरोग्य अस्पताल के कमलाराजा अस्पताल में मौत हो गई। बच्ची को गंभीर हालत में बाल रोग विभाग के पीआईसीयू में भर्ती कराया गया था। मासूम की मौत के बाद स्वजन ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपचार को लेकर हंगामा किया। स्वजन का आरोप है कि बच्ची को समय पर वेंटीलेटर नहीं मिल सका और वेंटीलेटर लगाने के नाम पर पांच हजार रुपये की मांग की गई।

वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बच्ची की हालत अस्पताल पहुंचने से पहले ही बेहद गंभीर थी और चिकित्सकों ने उसे बचाने के हरसंभव प्रयास किए।
पीएम के बाद बच्ची का शव स्वजन को सुपुर्द

बेहट रनगवां निवासी कोमल सिंह कुशवाह की चार वर्षीय बेटी कासवी को रविवार की रात सांप ने काट लिया था। मासूम की मौत के बाद स्वजन का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्वजन को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद बच्ची का शव स्वजन के सुपुर्द कर दिया गया।

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नाना बोले-समय पर वेंटीलेटर मिलता तो बच सकती थी जान

बच्ची के नाना रामसहाय ने आरोप लगाया कि कासवी की हालत लगातार गंभीर होती जा रही थी और उसे वेंटीलेटर की जरूरत थी। उनका कहना है कि वेंटीलेटर लगाने के एवज में डाक्टरों द्वारा पांच हजार रुपये की मांग की गई। स्वजन का आरोप है कि यदि बच्ची को समय रहते वेंटीलेटर मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी।

वेंटीलेटर के लिए रुपये मांगने के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि बच्ची की हालत पहले से ही अत्यंत गंभीर थी। अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू किया और उसे बचाने के लिए आवश्यक प्रयास किए गए, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। – डॉक्टर अजय गौड़, विभागाध्यक्ष बाल रोग विभाग केआरएच