चार चुनावी राज्यों में महिलाओं के लिए 24 हजार करोड़, तमिलनाडु में समर पैकेज, असम में बिहू बोनस

नई दिल्ली अगले महीने भारत के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इनमें से चार प्रमुख राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने चुनावी रणनीति के तहत सीधे कैश ट्रांसफर करने का बड़ा निर्णय लिया है। ये चारों राज्य महिलाओं के बैंक खातों में कुल 24,500 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का वादा कर रहे हैं। इन राज्यों का कहना है कि अगर वे सत्ता में आए, तो यह सहायता चालू रहेगी। तमिलनाडु का समर पैकेज और बिहार बोनस तमिलनाडु में, DMK सरकार ने विशेष समर पैकेज के तहत महिलाओं के खातों में 2-2 हजार रुपये डाल दिए हैं। इस कार्यक्रम को

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Published On :

मार्च 30, 2026

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नई दिल्ली

अगले महीने भारत के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इनमें से चार प्रमुख राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने चुनावी रणनीति के तहत सीधे कैश ट्रांसफर करने का बड़ा निर्णय लिया है। ये चारों राज्य महिलाओं के बैंक खातों में कुल 24,500 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का वादा कर रहे हैं। इन राज्यों का कहना है कि अगर वे सत्ता में आए, तो यह सहायता चालू रहेगी।

तमिलनाडु का समर पैकेज और बिहार बोनस
तमिलनाडु में, DMK सरकार ने विशेष समर पैकेज के तहत महिलाओं के खातों में 2-2 हजार रुपये डाल दिए हैं। इस कार्यक्रम को लेने के पीछे सरकार का लक्ष्य है कि महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हों। वहीं, असम की भाजपा सरकार ने बिहू समारोह के लिए महिलाओं को 4-4 हजार रुपये देने का ऐलान किया है, ताकि त्योहार का आनंद बढ़ सके।

केरल और बंगाल की योजनाएं
केरल में वामपंथी सरकार ने ‘स्त्री सुखम’ नकद योजना शुरू की है, जिसके तहत 10 लाख महिलाएं हर महीने 1,000 रुपये प्राप्त कर रही हैं। दूसरी ओर, बंगाल की तृणमूल सरकार ने लक्ष्मी भंडार स्कीम को लागू करते हुए फरवरी में 500 रुपये की वृद्धि की थी। ममता बनर्जी की सरकार का यह प्रयास अगले चुनाव में एक बार फिर से लाभ हुनाने का है।

महिलाओं का प्रभाव और वोटिंग ट्रेंड
इन चारों राज्यों में लगभग 4.1 करोड़ महिलाएं इन योजनाओं की लाभार्थी हैं, जो कुल वोटरों का 23% हैं। इसलिए ये योजनाएं चुनावी गणित में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रहीं हैं। पिछले 5 साल में देखा गया है कि महिलाओं को नकद सहायता देने वाले राज्यों की संख्या 1 से बढ़कर 15 हो गई है। इन राज्यों में 13 करोड़ से ज्यादा महिलाएं लाभ उठा रही हैं।

राज्य बजट और कैश ट्रांसफर की रुख
इतना ही नहीं, झारखंड जैसा राज्य तो अपने ग्रामीण विकास बजट का 81% हिस्सा महिलाओं को कैश ट्रांसफर करने में खर्च कर रहा है। ये सभी योजनाएं जबकि खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के बावजूद लागू हो रही हैं। हालांकि, यह भी देखने को मिल रहा है कि कई राज्य विकास योजनाओं को रोककर नकद स्कीमों पर ध्यान दे रहे हैं।

अब 15 राज्य दे रहे महिलाओं को नगद सहायता
बीते 5 साल में हुए चुनावों का ट्रेंड देखें तो पता चला है कि महिलाओं को कैश ट्रांसफर देने वाले राज्यों की संख्या एक से बढ़कर 15 हो गई है। ये राज्य 13 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को 2.46 लाख करोड़ रु. तक सालाना नकद पैसा ट्रांसफर कर रहे हैं, जो इन राज्यों के कुल बजट का 0.7% है। झारखंड जैसा राज्य अपने ग्रामीण विकास के कुल बजट का 81% हिस्सा महिलाओं को कैश ट्रांसफर में दे रहा है।

लेकिन, ट्रेंड ये भी है कि जो राज्य विकास योजनाओं को रोककर नकद स्कीमों पर खर्च कर रहे हैं, वहां कई योजनाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं। नकद स्कीमों के चलते महाराष्ट्र-कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों को अपने अहम खर्चों में कटौती करनी पड़ी है।

मुफ्त योजनाएं और अन्य लाभ
महत्वपूर्ण बात यह है कि ये कैश ट्रांसफर योजनाएं केवल महिलाओं के लिए नहीं हैं। तमिलनाडु में 2.22 करोड़ राशन कार्डधारकों को मुफ्त फ्रिज, एजुकेशन लोन वेवर और हर साल तीन गैस सिलेंडर मुफ्त प्रदान किए जा रहे हैं। केरल में कल्याण पेंशन स्कीम अब 62 लाख लोगों को लाभ पहुंचा रही है, और पेंशन राशि में भी बढ़ोतरी की गई है।

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बेरोजगारी से निपटने के प्रयास
बंगाल में करीब 1,500 करोड़ रुपये बेरोजगार युवाओं के लिए पेंशन योजना पर खर्च किए जा रहे हैं। इस तरह की योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें नौकरी की तलाश में मदद करना है। इस समय चारों राज्यों में महिलाओं को केन्द्रित करके चुनावी जंग लड़ी जा रही है।

इन राज्यों में गेमचेंजर बनीं कैश ट्रांसफर वाली योजनाएं

    मध्य प्रदेश: (2023): ‘लाड़ली बहना’ योजना के तहत 1.31 करोड़ महिलाओं को 1250 रुपए/माह; कई सीटों पर बढ़त।

    कर्नाटक (2023): ‘गृह लक्ष्मी’ योजना (2000 रु./माह) ने कांग्रेस को जीत दिलाई।

    ओडिशा (2024): ‘सुभद्रा’ योजना से भाजपा को पहली बार सत्ता।

    महाराष्ट्र (2024): ‘लाड़की बहिन’ योजना (1500 रुपए/माह), बड़ा महिला वोट आधार।

    झारखंड (2024): ‘मैया सम्मान’ योजना का चुनावी असर। हेमंत सोरेन की वापसी हुई।

चुनावी राज्यों में ये भी ‘मुफ्त’ योजनाएं…
तमिलनाडु में 2.22 करोड़ राशनकार्डधारकों को मुफ्त ​फ्रिज, एजुकेशन लोन वेवर और हर साल तीन गैस ​सिलेंडर मुफ्त। केरल में कल्याण पेंशन स्कीम में अब 62 लाख लोग। पेंशन भी 600 रु. बढ़ाकर 2 हजार रु. की। बंगाल में 1500 करोड़ रु. बेरोजगार युवा पेंशन पर खर्च हो रहे हैं।

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