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कोरोना का मानसिक सेहत पर बुरा असर

COVID Pandemic: कोरोना का मानसिक सेहत पर बुरा असर

कोरोना महामारी एक ऐसी आपदा है जिसने दुनिया को हिला कर रख दिया। समाज का ऐसा कोई वर्ग नहीं था जो इस महामारी से प्रभावित ना हुआ हो। कोई अपनों की जान की भीख मांग रहा था, तो कोई हजारों किलोमीटर पैदल चलकर अपने घर पहुंचने की कोशिश में था। महामारी के दौर में टीवी पर चलती खबरें झकझोर कर रख रही थी। आलम ये था कि लोगों को लोगों से ही डर लगने लगा था। 

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विश्व में आई कोरोना महामारी लोगों के लिए काल साबित हुई। जहां तमाम लोगों ने अपनों को खो दिया। वहीं महामारी की वजह से लॉकडाउन ने हर देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ कर रख दी। महामारी की वजह से लगाया गया लॉकडाउन लगा तो जनता की सुरक्षा के लिए था। पर उसका कुछ इस कदर नुकसान सामने आए, जिसका अंदाजा शायद किसी सरकार ने ना किया हो। महामारी के इस दौर में जहां लोग अपनी जान बचाने की जद्दोजहत में लगे थे। वहीं इस महामारी ने लोगों की मानसिक सेहत पर भी गहरा असर डाला। 

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देश में लगे लॉकडाउन ने घरों में बंद लोगों को मानसिक रुप से किस कदर खोखला किया। इस बात का अंदाजा आप इस आंकड़े से लगा सकते है कि महामारी के दौर में अकेले उत्तर प्रदेश के जिले जौनपुर में 15 लोगों ने मौत को गले लगा लिया। वहीं महाराष्ट्र के गोदिया जिले के 170 लोगों ने आत्महत्या कर ली। इन सभी आत्महत्याओं में एक बात समान थी। और वो थी ‘अवसाद’। महामारी के वक्त कई लोगों का रोजगार ठप्प हो गया। वहीँ कई युवाओं की नौकरियां छिन गई थी। 

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बात अगर महामारी की पहली वेव की करे। तो उस वक्त लोग शारीरिक दूरी के साथ सामाजिक दूरी का पालन कर रहे थे। कोरोना से पीड़ित लोगों के साथ बुरा बर्ताव किया जा रहा था। कई ऐसे मामले भी सामने आए। जहां लोग कोरोना से रिकवर हुए लोगों को भी नहीं अपना रहे थे । ऐसे में घरों में बंद तमाम लोगों की मानसिक हालात काफी खराब हो गई थी। किसी को नौकरी छूटने का डर था। तो किसी के सामने रोटी का संकट था। अपनों को खोने का गम था। तो कई घरों में बढ़ रही घरेलू हिंसा का खौफ था। हालात अलग थे। पर बढ़ रही बीमारी एक थी। बदलते माहौल ने लोगों और उनके हालात में धीरे-धीरे परिवर्तन लाया। 

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पर उसी बीच जब लोग संभलना शुरु ही कर रहे थे। तभी इस महामारी की दूसरी और पहले से ज्यादा घातक लहर लोगों के बीच आ गई।  पर इस बार हालात थोड़े अलग थे। पहले जहां लोग अपनी जान की परवाह कर रहे थे। वहीं अब लोग दूसरों की भी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। अस्पतालों में दवाईयों या ऑक्सीजन की मदद हो। या बीमार लोगों के घरों तक खाना पहुंचाना। हर तरीके से लोग एक दूसरे की मदद के लिए आगे आए। 

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बहरहाल कोरोना इस वक्त धीमा पड़ता दिखाई दे रहा है। लोग पहले की तरह जिंदगी को साधारण करने में लगे हुए हैं। पर महामारी अपने पीछे अपने निशान छोड़ गई है जिन निशानों को मिटने में अभी काफी वक्त लग सकता है। पर इस वक्त जरुरत है। आपसी सहयोग की एक दूसरे के साथ खड़े होने की और मानसिक हालातों को सामान्य बनाने की। 
 

अनुष्का सिंह

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