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Valmiki Jayanti 2021: जानें डाकू से महर्षि बनने की पूरी कहानी, आज है वाल्मीकि जयंती

Valmiki Jayanti 2021: जानें डाकू से महर्षि बनने की पूरी कहानी, आज है वाल्मीकि जयंती

वाल्मीकि जयंती शरद पूर्णिमा तिथि पर मनाई जाती है। आज रामायण के रचनाकार आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती है। महर्षि वाल्मीकि का जन्म अश्विन मास के शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा यानी कि शरद पूर्णिमा को हुआ था। महर्षि वाल्‍मीकि का जन्‍मदिवस देशभर में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार वैदिक काल के महान  ऋषि वाल्‍मीकि पहले डाकू थे लेकिन जीवन की एक घटना ने उन्हें बदलकर रख दिया। वाल्‍मीकि असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे शायद इसी वजह से लोग आज भी उनके जन्मदिवस पर कई विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।

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डाकू से म‍हर्षि वाल्‍मीकि बनने की कहानी-वाल्मीकि का जन्म महर्षि कश्यप और अदिति की 9वीं संतान वरुण और पत्नी चर्षणी के घर हुए थे।  बचपन में भील समुदाय के लोग उन्हें चुराकर ले गए थे और उनकी परवरिश भील समाज में ही हुई थी। वाल्मीकि से पहले उनका नाम रत्नाकर हुआ करता था। रत्नाकर जंगल से गुजरने वाले लोगों से लूट-पाट करते थे। एक बार जंगल से जब नारद मुनि गुजर रहे थे तो रत्नाकर ने उन्हें भी बंदी बना लिया था। तभी नारद ने उनसे पूछा कि ये सब पाप तुम क्यों करते हो? इस पर रत्नाकर ने जवाब दिया, 'मैं ये सब अपने परिवार के लिए करता हूं'। नारद हैरान हुए हो कर पूछा क्या तम्हारा परिवार तम्हारे पापो को भोगने के लिए त्यार है। वाल्मीकि ने निसंकोच हाँ में जवाब दिया।

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तभी मुनि बोले इतनी जल्दी जवाब देने से पहले अपने परिवार के लोगो से पूछ तो लो रत्नाकर घर लौटा और उसने परिवार के सभी सदस्यों से पूछा कि क्या कोई उसके पापों का फल भोगने को आगे आ सकता है? सभी ने इनकार कर दिया। इस घटना के बाद रत्नाक को काफी दुखी हुआ और उसने सभी गलत काम छोड़ने का फैसला कर लिया। इसके बाद वो राम के परम भक्त बन गए। वर्षों की तपस्या के बाद वो इतना शांत हो गए कि चींटियो ने उनके चारों ओर टीले बना लिए। इसलिए, इन्हें महर्षि वाल्मीकि की उपाधि दी गई, जिसका अर्थ होता है 'चींटी के टीले से पैदा हुआ।'


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