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पहली उपन्यास से मायानगरी तक का सफर...

पहली उपन्यास से मायानगरी तक का सफर

सपने उन्हीं के सच होते हैं, जो उन्हें देखने कि कोशिश करते हैं। बनारस-काशी, महादेव कि नगरी में जन्मे आर्यन उपाध्याय ने इस एक बात को अपने दिल और दिमाग में सहेज लिया, फिर क्या झोंक दी पूरी मेहनत, और उतार दिया सपने को हकीकत के धरातल पर। शुरुआत में कठिनाई किसे नहीं होती, पर आप जब उस रास्ते पर कछुए कि भांति भी आगे बढ़ें तो कामयाबी आप तक पहुंच ही जाती है। 'जयपुर डायरीज़' एक उपन्यास नहीं बल्कि एक ऐसी कहानी है जिसे "काल्पनिक" कहना ठीक नहीं होगा। कहानी कभी काल्पनिक नहीं हो सकती, क्योंकि जब किसी कहानी का आप मनन करते हैं तो उस वक्त वो कहानी आपके भीतर चल रही होती है। 
                 एक ऐसी प्रेम  कहानी जिसमें समर्पण है, समर्पण के बिना प्रेम का कोई अस्तित्व नहीं बस यही इस कहानी कि असल ताकत है। 

लोग कहते हैं - 

आर्यन उपाध्याय। जन्म और कर्म दोनों से लेखक मिज़ाज। क़रीबियों का कहना है कि ये जन्मे ही लेखन के लिए हैं। चलते-फिरते, उठते-बैठते कहानियाँ इनकी आँखों के सामने और मानस पटल पर उछलकूद करती रहती हैं और ये उन कहानियों में ख़ुद को उलझाए रखते हैं । आर्यन, कविताएँ भी लिखते हैं, और क्या ख़ूब लिखते हैं! जब मंच से रचनाएँ पढ़ते हैं तो युवा इनके कविताई इश्क़ के रंग में रंग जाते हैं, इसीलिए इन्हें ‘पोएट ऑफ़ रोमांस’ भी कहा जाता है।  
बनारस में जन्मे आर्यन, सपनों के सौदागर हैं और इन्होंने इस डायलॉग को दिल में सँजो रखा है कि सपने उन्हीं के पूरे होते हैं जो उन्हें देखने की हिम्मत करते हैं। इन्हें फ़ोटोग्राफ़ी का भी जबरा शौक़ है। आप इन्हें सोशल मीडिया पर बड़ी आसानी से खोज सकते हैं।  

     ' जयपुर डायरीज़ ' ख़ास क्यूँ है। आइए जानते हैं - 

यह मोहब्बत कि ऐसी कहानी है जिसके साकार होने की तमन्ना हर दिल में हमेशा जवाँ रहती है, फिर वह नौजवान हो या बु़जुर्ग। यह प्यार का ऐसा स़फर है जिस पर अमूमन हर कोई चलना चाहेगा। किशोरवय और यौवन के बीच खड़े किरदारों की यह कहानी स़ख्त दिलों को भी छू लेने की क्षमता रखती है। इसमें एक प्रेम-त्रिकोण है; एक नायक और दो नायिकाएँ। आम कहानियों के उलट, इस अलहदा कहानी में दोनों ही नायिकाएँ अपने नायक को पा लेती हैं और अंत में आकाश, सिया और नव्या ‘साथ-साथ' रहने लगते हैं। कैसे? यही तो इस प्रेम कहानी की ख़ूबसूरती है और इसका रहस्य भी। मुख्य कथानक के साथ ही समांतर रूप में चलने वाली अन्य दिलचस्प उपकथाएँ भी हैं। सहज भाषा-शैली में रचा गया यह उपन्यास पाठक को अंत तक बाँधे रखता है और अंतत: उसके मन में सुखद एहसास के साथ एक मीठी-सी कसक भी छोड़ जाता है। इसमें प्यार है, रोमांस है, चुहल है, कॉलेज की मस्ती है, लड़कपन की शरारतें हैं, दोस्ती के रंग हैं, साज़िशें भी हैं, और वह सबकुछ है जो आपको गुदगुदाएँगा, हँसाएगा, रुलाएगा, सपने दिखाएगा और रोमांचित करेगा। हकीक़त और कल्पना के मेल से रची गई ऐसी कथा जिस पर हर दिल सौ फ़ीसद यक़ीन करना चाहेगा।

जयपुर डायरीज़ का अबतक का सफर - उपन्यास आए कुछ ही महीने हुए थे कि आर्यन को उनकी इस उपन्यास ने सीधा बनारस से मायानगरी मुंबई तक का सफर करा दिया। जियो मुंबई फ़िल्म फेस्टिवल में इन्हें सीधा रास्ता मिला अंदर उन तमाम बड़े फ़िल्म डायरेक्टर के बीच अपनी कहानी को बड़े पर्दे तक ले जाने का । यही नहीं वर्ष 2020 में विश्व पुस्तक दिवस पर सबसे चर्चित किताब का खिताब भी इन्हें ही मिला जिसकी जानकारी हिन्दीनामा ने अपने ऑफिशियल आई डी पर सभी को दी । यह बात दर्शाती है कि पाठकों ने कैसे हाथों हाथ ली अपनी पसंदीदा उपन्यास को और और साथ ही उसके लेखक को भी । सिलसिला यहीं नहीं थमा बारी थी स्टोरीटेल की जिसने कहानी को ऑडियो के रूप में सरल तरीके से पाठकों के बीच उतारा। यह कई चीज़े दर्शाती हैं कि यदि आप में साहस है तो आपको सपना देखने और उसे पूरा करने का पूरा हक है। 


दूसरी उपन्यास कब तक - 2022 की शुरुआत में ही आर्यन अपने चाहने वालों तक अपनी दूसरी उपन्यास उपहार स्वरूप दे सकेंगे। 

अगर आप भी प्रेममय सफर का आनंद उठाना चाहते हैं और नव्या, सिया, आकाश कि ज़िन्दगी को नजदीक से जीना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक से अमेज़न पर अभी बुक करें। आपकी अपनी जयपुर डायरीज़।। 

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